Why do young people feel lonely – A surprising truth about loneliness

हाल ही में BBC द्वारा दुनियाभर में किए गए सर्वे से पता चला है कि आजकल युवा सबसे ज्यादा अकेलेपन (Loneliness) के शिकार हैं. पूरी दुनिया में 16 से 24 साल उम्र के 40% युवाओं ने ये माना कि वे अकेलेपन के शिकार हैं, और ये आंकड़े हैरत में डालने वाले और चिंताजनक हैं.

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हाल ही में BBC द्वारा दुनियाभर में किए गए सर्वे से पता चला है कि आजकल युवा सबसे ज्यादा अकेलेपन (Loneliness) के शिकार हैं. BBC द्वारा किये गये इस ऑनलाइन सर्वे में दुनियाभर से 55,000 लोगों ने हिस्सा लिया और नतीज़ा चौंकानेवाला था. जैसा कि मैटल हेल्थ एक्सपर्ट को अंदेशा था, पूरी दुनिया में 16 से 24 साल उम्र के 40% युवाओं ने ये माना कि वे अकेलेपन के शिकार हैं, और ये आंकड़े हैरत में डालने वाले और चिंताजनक हैं.

सर्वे के मुख्य तथ्य :

  • 16 से 24 वर्ष के आयु वर्ग के हर आठ में से एक युवा डिप्रेशन से जूझ रहा है.
  • एक तिहाई लोग अक्सर या बहुत बार अकेलापन महसूस करते हैं
  • जिन लोगों को भेदभाव महसूस होता है उनमें अकेलापन महसूस करने की संभावना अधिक होती है.
  • अकेलापन महसूस करने पर लोग शर्म महसूस करते हैं और इस संबध में बात करने से कतराते हैं.
  • अकेलेपन के बारे में बात करने की झिझक उम्र के साथ कम होती जाती है.
  • जो लोग अकेलापन महसूस करते हैं उनका दूसरों पर बहुत कम भरोसा करते है.
  • बदलता रवैया, बढ़ती ख़्वाहिशे और तनाव अकेलेपन की मुख्य वजहे हैं.
  • हमेशा कंप्यूटर या मोबाइल से चिपके रहने वाले लोगों को अकेलापन महसूस होता है उनके अधिकतर दोस्त ऑनलाइन होते हैं
  • खराब स्वास्थ्य के कारण भी लोग अक्सर अकेलापन महसूस करते हैं.

क्या आपका बच्चा अकेलेपन (loneliness) की प्रॉब्लम से जूझ रहा है ?

  • अगर आपका बच्चा अक्सर सुबह बिस्तर से उठने में नानुकुर करे, उसे सुबह बिस्तर से उठने का मन ही नहीं करता. सुबह उठते ही वो लो एनर्जी या थकान की शिकायत करता है, तो इसका मतलब है कि उसकी मेंटल हेल्थ ठीक नहीं.
  • वह अकेला रहना ही पसंद करने लगे. कॉलेज में भी वे दोस्तों के साथ समय न बिताता हो.
  • फ्रेंड के साथ या आपके साथ कहीं बाहर जाने में आनाकानी करने लगे.
  • वो चिड़चिड़ा हो गया है. छोटी-छोटी बात पर नाराज़ हो जाता है, किसी से बात नहीं करता. लोगों से कटा-कटा-सा रहता है.
  • उसे अचानक लगने लगा है कि उसे कोई पसंद नहीं करता. उसे किसी का भी साथ अच्छा नहीं लगता है और वो समझता है कि लोग भी उसके साथ रहने से कतराने लगे हैं.
  • किसी सोशल फंक्शन या गेट-टुगेदर में वो बोर महूसस करे.
  • हर समय निगेटिव सोचे या बोले.
  • कॉन्फिडेंस की कमी आ जाए,
  • नींद की कमी या भूख न लगने की शिकायत करे.
  • बार-बार बीमार पड़ने लगे या हर समय दर्द की शिकायत करे.

अकेलापन (loneliness) महसूस होने के कारण :

स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल पर बढ़ता तनाव एक वजह हो सकता है. स्टूडेंट्स को टॉप पर बने रहने का तनाव, करियर या जॉब को लेकर तनाव, ऑफिस का तनाव, फाइनेंशियल प्रोब्लेम्स और इन सब जगहों पर 100 प्रतिशत परफेक्ट बने रहने की चिंता आपको हर समय तनाव में रहने को मजबूर करती है और तनाव आपको धीरे-धीरे लोगों से दूर करने लगता है.

जहां तक युवा बच्चों की बात है, तो कहने को तो उनका सामाजिक दायरा बहुत बड़ा होता है और वे हर समय दोस्तों से घिरे रहते हैं, लेकिन इनमें ऐसा कोई नहीं होता, जिससे वो अपने मन की बात शेयर कर सके.

सोशल मीडिया ने भी लोगों में अकेलापन बढ़ाया है. यहां उन्हें ऑनलाइन तो बहुत भीड़ मिलती है, लेकिन ये सारे रिश्ते गंभीर नहीं (superficial) होते हैं और जब भी वे ऑनलाइन भीड़ से बाहर निकलते है और एहसास होता है कि असल में तो कोई उनके आसपास है ही नहीं, वो अकेलापन महसूस करने लगते हैं.

ध्यान रखें जितना अधिक समय आप सोशल मीडिया पर बिताएंगे, उतना ही आपमें दूसरों को सुनने-समझने का धैर्य और क्षमता कम होती जाएगी और आपकी लोगों से सम्पर्क कम या खत्म होता जाएगा

आजकल युवा अपने खिलाफ कुछ भी सुनना नहीं चाहते, न कोई आलोचना, न कोई विरोधी बात, न ही किसी की सोच से सहमत होना चाहते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया ने उन्हें ऐसे ही दोस्ती और रिश्ते की आदत डाल दी है कि वे उन्हीं लोगों से कनेक्ट होना चाहते हैं, जो हमेशा उनकी हां में हां मिलाएं और एक लाइक का बटन दबाकर इसकी सहमति दे दें.

“रिश्ते निभाना उतना आसान नहीं, जितना लाइक का बटन दबाना” इस बात को समझना भी बेहद ज़रूरी है. हम प्रत्यक्ष रिश्ते निभाने का आर्ट भूलते ही जा रहे हैं, जो हमारे मानसिक स्वस्थ के लिए ठीक नहीं है.

बच्चों की पैरेंट्स से बॉन्डिंग भी कमज़ोर हो रही है. दोनों पैरेंट्स के वर्किंग होने और हेक्टिक शेड्यूल के कारण अब पैरेंट्स और बच्चों में पहले की तरह कनेक्टिविटी नहीं रह गई है,

विशेषज्ञों (experts) का मानना है कि आज की तेज जिंदगी में लोग भावनाशून्य (Feeling less) होते जा रहे हैं, लोगों से मिलना-जुलना, बातें करना युवाओं को समय की बर्बादी लगती है. भावनाओं या सोशल लाइफ का ना होना भी अकेलापन का एक कारण है.

16 से 24 के बीच युवाओं के शरीर में अचानक कई बदलाव आते हैं और वो न खुद को समझ पाते हैं. न ही अपने शरीर और मन को. ये उलझन भी उन्हें अकेला बनाती है.

इसके अलावा इस उम्र में जीवन में काफ़ी तेज़ी से और जल्दी-जल्दी बदलाव आते है. स्कूल से कॉलेज, कॉलेज से करियर, ऑफिस. एक शहर से दूसरे शहर में मूवमेंट, पारिवारिक ज़िम्मेदारियां बढ़ना… इतने सारे बदलाव के बीच एडजस्टमेंट मुश्किल हो जाता है. साथ ही इन बदलावों से उनके सोशल नेटवर्क और रिलेशनशिप में भी जल्दी-जल्दी बदलाव आते हैं, जिसे लोग एडजस्ट नहीं कर पाते और कई बार डिप्रेशन में चले जाते हैं और धीरे-धीरे अकेलेपन का शिकार होने लगते हैं.

अगर अकेलेपन (loneliness) महसूस हो तो ये करें:

⊕ सबसे पहले परिस्थितियों पर नज़र डालें. ये जानने की कोशिश करें कि आप अकेलापन क्यों महसूस कर रहे हैं. उन हालात से बाहर निकलने के तरीके तलाशें.

⊕ ऐसे चार-पांच लोगों की सूची बनाएं जिस पर आपको यकीन है और जिससे आप बेझिझक अपने मन की बात कह सकते हैं. ये आपके परिवारिक सदस्य या फिर करीबी मित्र हो सकते हैं.  जब भी आप अकेलापन महसूस करें, इनमें से किसी के भी साथ फोन पर या मिल कर दिल की बात शेयर करें, आप बेहतर महसूस करेंगे,

⊕ ऑनलाइन एक्टिविटी को थोड़ा कम कर दें. सोशल मीडिया के पहले आपको किस एक्टिविटी से बेहतर महसूस होता था या क्या करके आप खुशी महसूस करते थे, उन्हें याद करने की कोशिश करें और उन एक्टिविटी से खुद को फिर कनेक्ट करें,

⊕ अपने परिवार व दोस्तों को थोड़ा समय दें. उनसे जुड़ने की कोशिश करें, अपनों से कनेक्टिविटी अकेलेपन को कम करती है,

⊕ अकेले हो तब भी खुद को बोर न होने दें. अपने आपको थोड़ा वक़्त दें, ख़ुद को, अपनी खुशियों को पहचानें.

⊕ जब भी नए लोगों से मिलें, उनमे कमियां खोजने की बजाय उनकी अच्छाइयों पर ध्यान दें. इससे उसके साथ आपके रिश्ते में विश्वास पनपेगा.

⊕ कई बार हम बेवजह डिप्रेशन या अकेलापन महसूस करने लगते हैं. ऐसी स्थिति से उबरना सिर्फ आपके हाथ में है, बस आपको अपनी सोच को सकरात्मक करना होगा.

⊕ अगर इतना सब करके भी आपको लगे कि आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं, तो बिना समय गंवाए किसी एक्सपर्ट से मिलें, ताकि आप जल्दी से जल्दी इस स्थिति से बाहर निकल सकें.

परिवारिक सदस्यों की भूमिका :

परिवार का कोई भी सदस्य इस तरह की मानसिक स्थिति से गुज़र रहा है, तो परिवार के सदस्य उसकी सहायता कर सकते हैं,

  • उसे ये एहसास दिलाएं कि आप हर हाल में और हमेशा उसके साथ हैं.
  • उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं, ताकि वो खुलकर अपने मन की बात शेयर कर सके.
  • उसकी मनःस्थिति को लेकर जजमेंटल न बने और फ़ौरन किसी नतीजे पर न पहुंचे, ताकि वो अपने मन की बात आपसे खुलकर शेयर कर सके.
  • उस पर किसी तरह का दबाव बनाने से बचें.

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