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दीपावली | Deepawali

दिवाली या दीपावली (Deepawali) का त्योहार भारत की वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण और भव्य त्योहारों में से एक है। त्योहार है। इस त्योहार का नाम मिट्टी के दीयों (दीप) की पंक्ति या शृंखला (आवली) से मिल कर (दीप+आवली) बना है। इस दिन भारतीय लोग अपने घरों के बाहर प्रकाश करने के लिए दीप माला करते हैं जो आध्यात्मिक अंधकार से आंतरिक प्रकाश की ओर सफर का प्रतीक है।

सदियों से मनाया जाने वाला ये त्योहार एक राष्ट्रीय त्योहार बन गया है भले ही दिवाली को मुख्य रूप से एक हिंदू त्योहार माना जाता है, लेकिन जिसका आनंद गैर-हिंदू समुदायों द्वारा भी लिया जाता है। उदाहरण के लिए, जैन धर्म में, दिवाली 15 अक्टूबर, 527 ई.पू. को भगवान महावीर के निर्वाण या आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है; सिख धर्म में, यह यह दिन छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद जी और अन्य 52 हिंदू राजाओं के साथ मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा कारावास से मुक्त किये जाने पर “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में मनाया जाता है। भारत में बौद्ध धर्म को मानने वाले भी दिवाली का त्योहार बड़े उल्लास से मनाते हैं। । हर जगह, दिवाली “आध्यात्मिक अंधेरे पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान” की जीत का प्रतीक है।

Diwali-Celebrations

रोशनी का त्योहार दीपावली अग्रेजी कैलंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने (कार्तिक महीने की आमावस या कार्तिक अमावस्या) में  मनाया जाता है, आमतौर पर धनतेरस से शुरू होकर पांच दिनों तक चलता है, अगले दिन नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजन (बड़ी दिवाली), गोवर्धन पूजा और भाई दूज होता है। यह मौज मस्ती और खुशियों का त्योहार है। लोग अपने घरों और कार्यालयों को विभिन्न रोशनीयों से सजाते हैं, स्वादिष्ट भोजन पकाते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और खुशियाँ साझा करते हैं। व्यापार के स्थानों पर, कई लोग दिवाली को अपने वित्तीय नए साल की शुरुआत मानते हैं।

पुराणिक कथाओं के अनुसार दिवाली भगवान रामचंद्र के सम्मान में मनाई जाती है क्योंकि इस दिन भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। इस निर्वासन अवधि के दौरान, उन्होंने राक्षसों और राक्षस राजा रावण के साथ युद्ध किया, जो लंका के शक्तिशाली शासक थे। राम की वापसी पर, अयोध्या के लोगों ने उनका स्वागत करने और उनकी जीत का जश्न मनाने के लिए अपने घरों में दीपमाला की थी। तभी से दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है।

भारतीयों के लिए दिवाली की तैयारियों का बहुत महत्वपूर्ण है। त्योहार की वास्तविक तिथि से एक महीने पहले तैयारी शुरू हो जाती है और लोग नए कपड़े, नए बर्तन, उपहार, रोशनीयां, पटाखे, मिठाई, सूखे मेवे आदि की खरीददारी करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी दिवाली की रात को पूजा स्थल पर आती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं। इसलिये लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करके उसे नया रंग करवाते हैं। कुछ लोग पुरानी चीजों को त्यागने और साल में एक बार नई चीजों को खरीदने में भी विश्वास करते हैं।

Diwali-celebrations

दिवाली की पूर्व संध्या पर लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की भी पूजा करते हैं। विघ्नों के नाश करने वाले भगवान गणेश की पूजा बुद्धि और तेज के लिए तथा देवी लक्ष्मी की पूजा धन और समृद्धि के लिए की जाती है। कहा जाता है कि दिवाली पूजा इन देवताओं के आशीर्वाद का आह्वान करती है। त्योहार के दिन, आंगनों को रंग-बिरंगी रंगोली से सजाया जाता है, और रंगोली पर दीप जलाए जाते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं, व्यंजन खाते हैं, दीपक जलाते हैं और अँधेरा होने पर पटाखे फोड़ते हैं।

पूरी दुनिया में बसने वाले भारतीय दीपक जला कर  दीवाली मनाते हैं, दिवाली को सही मायने में प्रकाश का त्योहार कहा जाता है क्योंकि इस दिन पूरी दुनिया जगमगाती है। कई सैटेलाइट इमेज दिखाती हैं कि दिवाली पर भारत कैसा दिखता है। भारत में अमृतसर शहर (पंजाब) की दिवाली बहुत मशहूर है।

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